पश्चिम आँचल के युवाओं का दूसरे प्रदेशों में हाल ?
जब ये बाहरी लोग आपकी संस्कृति को ही खतम कर देंगे तब फिरना इधर उधर अपनी पहचान बताते हुए और शायद ही उस समय आपकी सुनने वाला कोई होगा.
किसी महान लेखक और इतिहासकार ने एक बार लिखा था कि अगर आप किसी प्रदेश या देश को खतम करना चाहते है तो वहाँ के तीज त्योहार और संस्कृति खतम कर दो वो ख़ुद पे ख़ुद समाप्त हो जाएगा और ये काफ़ी हद तक ठीक भी है.
ये जो ऊपर तार पे लटके हुए पक्षी देख रहे है ना ये दरासल पक्षी नहि है हम पश्चिम आँचल वालों में से ही कोई एक है जो अपना क्षेत्र और संस्कृति अपनी खड़ी बोली को छोड़कर इधर उधर लटका फिरता है और शायद अपने आपको थोड़ा सा पैसे वाला समझ कर यहाँ रह रहे लोगों को अनपढ़ और गंवार भी कह दे तो कोई असचर्य नहि होगा क्यूँकि उसकी तो लाइफ़ सेट है ऐसा उसका मानना है, और यही हक़ीक़त भी है आजकल के नोजवानो की
पर एक बात जो दिल में आती ह की क्या हम सब यहाँ रहकर थोड़े वक़्त तक का संघर्ष नहि कर सकते जिससे आगे आने वाले समय में आपको और आपकी आने वाली नस्लों को बाहर ना यु लटकना पड़े,देर से ही सहि मगर अपना अलग राज्य अगर मिल गया तो आप यहाँ अपनो के बीच रहकर अपनो का विकास करेंगे और लोग आपको आपकी संस्कृति और विशसेता की वजह से जानेगे ना की किसी सीधे उल्टे तार पे लटके हुए पक्षी की तरह,
दम लगाइए अपना अलग प्रदेश बनवाइए उत्तम प्रदेश बनवाइए
किसी महान लेखक और इतिहासकार ने एक बार लिखा था कि अगर आप किसी प्रदेश या देश को खतम करना चाहते है तो वहाँ के तीज त्योहार और संस्कृति खतम कर दो वो ख़ुद पे ख़ुद समाप्त हो जाएगा और ये काफ़ी हद तक ठीक भी है.
ये जो ऊपर तार पे लटके हुए पक्षी देख रहे है ना ये दरासल पक्षी नहि है हम पश्चिम आँचल वालों में से ही कोई एक है जो अपना क्षेत्र और संस्कृति अपनी खड़ी बोली को छोड़कर इधर उधर लटका फिरता है और शायद अपने आपको थोड़ा सा पैसे वाला समझ कर यहाँ रह रहे लोगों को अनपढ़ और गंवार भी कह दे तो कोई असचर्य नहि होगा क्यूँकि उसकी तो लाइफ़ सेट है ऐसा उसका मानना है, और यही हक़ीक़त भी है आजकल के नोजवानो की
पर एक बात जो दिल में आती ह की क्या हम सब यहाँ रहकर थोड़े वक़्त तक का संघर्ष नहि कर सकते जिससे आगे आने वाले समय में आपको और आपकी आने वाली नस्लों को बाहर ना यु लटकना पड़े,देर से ही सहि मगर अपना अलग राज्य अगर मिल गया तो आप यहाँ अपनो के बीच रहकर अपनो का विकास करेंगे और लोग आपको आपकी संस्कृति और विशसेता की वजह से जानेगे ना की किसी सीधे उल्टे तार पे लटके हुए पक्षी की तरह,
दम लगाइए अपना अलग प्रदेश बनवाइए उत्तम प्रदेश बनवाइए

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