ऐसे भी लग रहा है भारतीय रेल को करोड़ों का चूना?
वैसे अगर ध्यान से देखा जाए तो इन टिकटों में कोई बुराई भी नहीं है क्योंकि कोई भी व्यक्ति इनमें से कोई भी टिकट लेकर अपनी मंजिल तक आसानी से पहुंच सकता है और हो सके तो उसे आगे कोई दिक्कत भी नहीं आएगी क्योंकि उसके पास तो टिकट है पर अगर आप यहां से किसी भी छोटे रेलवे स्टेशन से जहां रहे हो किसी भी बड़े रेलवे स्टेशन की ओर जैसे कि लोनी शाहदरा और दिल्ली तो आपको हो सकती है बहुत ही बड़ी दुविधा
असल में होता क्या है जो यह छोटे रेलवे स्टेशन वाले टिकट बांटने वाले आदमी हैं जिन्हें रेलवे ने इस चीज का ठेका दिया होता है वह क्या करते हैं यह जो पीले वाला पुराना रंग का टिकट है इसको ही आ दूसरे व्यक्ति को छोटे या फिर कुछ कम दाम में दे देते हैं वह खुद ही इस चीज को बताते हैं और जब कोई भी ट्रेन आती है तो उनके सामने खड़े हो जाते हैं और पूछते हैं आपको टिकट बेचना है क्या आपको टिकट बेचना है क्या जब कोई भी व्यक्ति अपना टिकट बेच देता है तो वह ही टिकट दूसरे आदमी को वह बेच देते हैं नई तारीख मारकर उसके हिसाब से अब अगर देखा जाए तो यह पुराने टिकट आधे भाव में लेते हैं ।
इससे होता यह है कि सरकार द्वारा दिए गए नए टिकट की बिक्री बहुत ही कम होती है और यह अपने पुराने ही टिकट पर नहीं तारीख डाल डाल कर लोगों को देते रहते हैं जिससे कि टिकटों की बिक्री में बहुत ही घाटा होता है।
तो अब इसका एक सीधा सा यह ही तरीका रह गया है कि यह जो सरकार ने दूसरा टिकट कागज वाला निकाला है इसको ही प्रचलित करना चाहिए क्योंकि इस पर रोज नई अलग तरीके की स्याही से स्टैंप लगाई दी जाती है जिससे कि उसका पता चल जाता है कि वह कब खरीदी और बेची गई है
इस लेख के रूप में मैं यही दरखास्त करना चाहता हूं कि आपको यह जो पुराने पीले गट्टे के रंग के टिकट है बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए क्योंकि इनमें ठेकेदार उल्टे सीधे रेट में पुराने टिकट ने यात्री को बेच देते हैं जिससे सरकार को बहुत ही बड़ा घाटा होता जा रहा है मैं टिकट तो बिल्कुल भी नहीं बिकते और यह पुराने टिकट ही यात्रियों को बेचते रहते हैं
क्यूँकि आपको तो बिलकुल पता नहीं चलेगा की ये पूरना गत्ते वाला टिकट कब का ह तो आपकी सुविधा के लिए हम आपको बता दे आपको नया काग़ज़ वाला टिकट ही लेना चाहिए जिससे इस धोखाधड़ी मे कमी आ सके और लोग तथा सरकार दोंनो ही फ़ायदे मे रहे और देश भी फ़ायदे में हमेशा काग़ज़ वाले टिकट की माँग करे, इसी के साथ साथ सरकार से भी निवेदन है की गत्ते वाले टिकट बंद करके सभी काग़ज़ वाले प्रचलन मे कर देने चाहिए
असल में होता क्या है जो यह छोटे रेलवे स्टेशन वाले टिकट बांटने वाले आदमी हैं जिन्हें रेलवे ने इस चीज का ठेका दिया होता है वह क्या करते हैं यह जो पीले वाला पुराना रंग का टिकट है इसको ही आ दूसरे व्यक्ति को छोटे या फिर कुछ कम दाम में दे देते हैं वह खुद ही इस चीज को बताते हैं और जब कोई भी ट्रेन आती है तो उनके सामने खड़े हो जाते हैं और पूछते हैं आपको टिकट बेचना है क्या आपको टिकट बेचना है क्या जब कोई भी व्यक्ति अपना टिकट बेच देता है तो वह ही टिकट दूसरे आदमी को वह बेच देते हैं नई तारीख मारकर उसके हिसाब से अब अगर देखा जाए तो यह पुराने टिकट आधे भाव में लेते हैं ।
इससे होता यह है कि सरकार द्वारा दिए गए नए टिकट की बिक्री बहुत ही कम होती है और यह अपने पुराने ही टिकट पर नहीं तारीख डाल डाल कर लोगों को देते रहते हैं जिससे कि टिकटों की बिक्री में बहुत ही घाटा होता है।
तो अब इसका एक सीधा सा यह ही तरीका रह गया है कि यह जो सरकार ने दूसरा टिकट कागज वाला निकाला है इसको ही प्रचलित करना चाहिए क्योंकि इस पर रोज नई अलग तरीके की स्याही से स्टैंप लगाई दी जाती है जिससे कि उसका पता चल जाता है कि वह कब खरीदी और बेची गई है
इस लेख के रूप में मैं यही दरखास्त करना चाहता हूं कि आपको यह जो पुराने पीले गट्टे के रंग के टिकट है बिल्कुल बंद कर देनी चाहिए क्योंकि इनमें ठेकेदार उल्टे सीधे रेट में पुराने टिकट ने यात्री को बेच देते हैं जिससे सरकार को बहुत ही बड़ा घाटा होता जा रहा है मैं टिकट तो बिल्कुल भी नहीं बिकते और यह पुराने टिकट ही यात्रियों को बेचते रहते हैं
क्यूँकि आपको तो बिलकुल पता नहीं चलेगा की ये पूरना गत्ते वाला टिकट कब का ह तो आपकी सुविधा के लिए हम आपको बता दे आपको नया काग़ज़ वाला टिकट ही लेना चाहिए जिससे इस धोखाधड़ी मे कमी आ सके और लोग तथा सरकार दोंनो ही फ़ायदे मे रहे और देश भी फ़ायदे में हमेशा काग़ज़ वाले टिकट की माँग करे, इसी के साथ साथ सरकार से भी निवेदन है की गत्ते वाले टिकट बंद करके सभी काग़ज़ वाले प्रचलन मे कर देने चाहिए

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